मंत्र संग्रह :: अग्नि जिमाने का मन्त्र

अग्नि जिमाने का मन्त्र

मंत्र क्या है ?

मंत्र शब्द मन +त्र के संयोग से बना है !मन का अर्थ है सोच ,विचार ,मनन ,या चिंतन करना ! और “त्र ” का अर्थ है बचाने वाला , सब प्रकार के अनर्थ, भय से !लिंग भेद से मंत्रो का विभाजन पुरुष ,स्त्री ,तथा नपुंसक के रूप में है !पुरुष मन्त्रों के अंत में “हूं फट ” स्त्री मंत्रो के अंत में “स्वाहा ” ,तथा नपुंसक मन्त्रों के अंत में “नमः ” लगता है ! मंत्र साधना का योग से घनिष्ठ सम्बन्ध है…

अग्नि जिमाने का मन्त्र

ॐ भूपतये स्वाहा, ॐ भुवनप, ॐ भुवनपतये स्वाहा ।
ॐ भूतानां पतये स्वाहा ।।
कहकर तीन आहूतियाँ बने हुए भोजन को डालें ।

या
।। ॐ नमो नारायणाय ।। कहकर नमक रहित अन्न को अग्नि में डालें ।

अनमोल विचार
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