नवग्रह मंत्र संग्रह :: तृतीयं चन्द्रघण्टा

तृतीयं चन्द्रघण्टा

नवग्रह मंत्र

दुर्गा पूजा शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्र में मनाने का कारण यह है कि इस अवधि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में दुर्गा की पूजा की जाती है।दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियाँ जागृत होकर नवों ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नवों शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ नौ तथा अर्ण का अर्थ अक्षर होता है।

तृतीयं चन्द्रघण्टा
कई बार जीवन में अशुभ ग्रहों की वजह से भी, कई मुश्किलें खड़ी हो जाती हैं। जीवन रुपी आकाश में संकट के बादल घिर जाते हैं। आशा की एक किरण भी नज़र नहीं आती। ऐसे अशुभ ग्रहों से उपजे संकट का नाश करती हैं मां चंद्र घंटा
मां चंद्रघंटा का संकटनाशक मंत्र
हिनस्ति दैत्य तेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्।
सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योsनः सुतानिव।।
मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगायें।

मंत्र : चन्द्रघण्टा
पिण्डजप्रवरारुढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता ।
प्रसादं तनुते मह्यां चन्द्रघण्टेति विश्रुता ॥

चंद्रघंटा:- मां दुर्गा का तीसरा स्वरूप

माँ दुर्गा का तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा है | नवरात्रि में तीसरे दिन इसी स्वरूप की पूजा की जाती है | इस दिन साधक का मन 'मणिपूर' चक्र में प्रविष्ट होता है | नवरात्रि में तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा का विधान है | माता चंद्रघंटा की कृपा से साधक परलौकिक दिव्यता कि अनुभूति होती है |

इस देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है| इसीलिए इस देवी को चंद्रघंटा कहा गया है| इनके शरीर का रंग सोने के समान है| इनके दस हाथ है और सभी हाथ खड्ग और शस्त्रों से विभूषित है | सिंह पर सवार माँ चंद्रघंटा की छवि अनुपम है | देवी चंद्रघंटा के पूजन के दिन साधक का मन “मणिपूर” चक्र में प्रविष्ट होता है|

स्तुति मंत्र :-

या देवी सर्वभू‍तेषु चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

मूलमंत्र:- माता चंद्रघंटा की आराधना हेतु मंत्र इस प्रकार है -

पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकेर्युता |
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता ||

कूष्माण्डा:- मां दुर्गा का चौथा स्वरूप

माँ दुर्गा का चतुर्थ स्वरूप कुष्मांडा है| नवरात्रि में चौथे दिन इसी स्वरूप की पूजा की जाती है |

अनमोल विचार