नवग्रह मंत्र संग्रह :: षष्ठम् कात्यायिनी

षष्ठम् कात्यायिनी

नवग्रह मंत्र

दुर्गा पूजा शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्र में मनाने का कारण यह है कि इस अवधि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में दुर्गा की पूजा की जाती है।दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियाँ जागृत होकर नवों ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नवों शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ नौ तथा अर्ण का अर्थ अक्षर होता है।

षष्ठम् कात्यायिनी
लंबे समय से अगर आप वैवाहिक जीवन के कष्ट से जूझ रहे हैं। नौबत तलाक तक आ पहुंची है। तो आप वैवाहिक जीवन को सुखी बनाने और कोर्ट केस से छुटकारा पाने के लिये, कात्यायिनी माता की पूजा करें।
मां कात्यायनी का दाम्पत्य दीर्घसुख प्राप्ति मंत्र
एतत्ते वदनं सौम्यम् लोचनत्रय भूषितम्।
पातु नः सर्वभीतिभ्यः कात्यायिनी नमोsस्तुते।।
माता को नारियल के लड्डू का भोग लगायें।

मंत्र : कात्यायनी
चन्द्रहासोज्वलकरा शार्दूलवरवाहना ।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ॥

कात्यायनी :- मां दुर्गा का छठवां स्वरूप

माँ दुर्गा का षष्टम स्वरूप कात्यायनी है | नवरात्रि में छठे दिन इसी स्वरूप की पूजा की जाती है |

माता दुर्गा के कात्यायनी होने के पीछे पुराणों में एक कथा आती है, जो इस प्रकार से है – महर्षि कात्यायन जो कि कात्य गोत्र में उत्पन्न हुए थे, उन्होंने भगवती दुर्गा को प्रसन्न करने हेतु घोर तप किया | और माता भगवती प्रसन्न हो वर स्वरुप उनके घर में जन्म लिया | माता जगदम्बा को कात्यायनी भी कहा जाता है |

इनकी पूजा करने वालें भक्तो की सभी मनोकामनाये पूर्ण हो जाती है, और सभी प्रकार के पापों का नाश होता है | पूजा के छठे दिन साधक का मन “आज्ञा” चक्र में स्थित होता है |
स्तुति मंत्र :-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता | नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

मूलमंत्र:- माता कात्यायनी की आराधना हेतु मंत्र इस प्रकार है -

चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना | कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी ||

अनमोल विचार