नवग्रह मंत्र संग्रह :: महागौरी अष्टमम्

महागौरी अष्टमम्

नवग्रह मंत्र

दुर्गा पूजा शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्र में मनाने का कारण यह है कि इस अवधि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में दुर्गा की पूजा की जाती है।दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियाँ जागृत होकर नवों ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नवों शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ नौ तथा अर्ण का अर्थ अक्षर होता है।

महागौरी अष्टमम्
अगर आपके मन में बहुत ऐश्वर्य और प्रसिद्धि पाने की इच्छा हो तो आठवें दिन मां महागौरी की आराधना करें। इनकी कृपा से व्यक्ति देखते-देखते मशहूर हो जाता है।
मां महागौरी का परम ऐश्वर्य सिद्धि मंत्र
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोsस्तुते।।
महागौरी मां को साबूदाने की खीर का भोग लगायें।

मंत्र : महागौरी
श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचिः ।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा ॥

महागौरी:- मां दुर्गा का आठवां स्वरूप

माँ दुर्गा का अष्टम स्वरूप महागौरी है | नवरात्रि में आठवें दिन इसी स्वरूप की पूजा की जाती है |

महागौरी शब्द से स्पष्ट है कि इनका वर्ण अत्यधिक गौरा है, इसलिए इन्हें महागौरी भी कहा गया है | पुराणों में इन्हें अष्टवर्षा, अर्थात आठसाल आयु वाली देवी की संज्ञा दी गई है | तथा श्वेत वस्त्र और आभूषण धारण करने के कारण इन्हें श्वेताम्बरधरा भी कहते है | इनका वाहन होने से ये वृषारूढ़ा भी कहलाती है | माता के इस रूप का दर्शन सुलभ नहीं है, कठिन से कठिन तप से भी इस रूप का दर्शन अप्राप्य माना गया है |

माता महागौरी की आराधना से भक्तों के सारे कष्ट मिट जाते और सभी सिद्धियाँ हस्तगत हो जाती है |

स्तुति मंत्र :-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ महागौरी रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

मूलमंत्र:- माता महागौरी की आराधना हेतु मंत्र इस प्रकार है -

श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः |
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया ||

अनमोल विचार