नवग्रह मंत्र संग्रह :: पंचमम् स्कन्दमाता

पंचमम् स्कन्दमाता

नवग्रह मंत्र

दुर्गा पूजा शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्र में मनाने का कारण यह है कि इस अवधि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में दुर्गा की पूजा की जाती है।दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियाँ जागृत होकर नवों ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नवों शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ नौ तथा अर्ण का अर्थ अक्षर होता है।

पंचमम् स्कन्दमाता
अगर आप चाहते हैं कि आपकी बुद्धि और बातचीत से हर कोई प्रभावित हो, तो इसके लिये पांचवी स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिये। मीडिया और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के लिये स्कंदमाता चमत्कार कर सकती हैं।
स्कंदमाता का बुद्धि विकास मंत्र
सौम्या सौम्यतराशेष सौम्येभ्यस्त्वति सुन्दरी।
परापराणां परमा त्वमेव परमेश्वरी।।
स्कंदमाता को हलवे का भोग लगायें।

मंत्र : स्कन्दमाता
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया ।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी ॥

स्कंदमाता:- मां दुर्गा का पांचवा स्वरूप

माँ दुर्गा का पंचम स्वरूप स्कंदमाता है | नवरात्रि में पांचवे दिन इसी स्वरूप की पूजा की जाती है | स्कंद अर्थात कार्तिकेय, इनकी माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से जाना जाता है | स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजित है, इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है |

स्वरूप:- स्कंदमाता चार भुजाओं से युक्त है, यथा प्रथम दायीं भुजा में स्कंद और द्वित्तीय भुजा में कमल-पुष्प शोभायमान है, तथा प्रथम बायीं भुजा में आशीर्वाद-मुद्रा द्वित्तीय भुजा में पुष्प लिए हुए है, इनका वाहन सिंह है |

स्कंदमाता के पूजन को मोक्षदायी माना जाता तथा इसकी पूजा और आराधना से भक्तों के सभी कष्टों का निवारण होता है |
स्तुति मंत्र :-

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

मूलमंत्र:- स्कंदमाता की आराधना हेतु मंत्र इस प्रकार है -

सिंहसनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया |
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी ||

अनमोल विचार