नवग्रह मंत्र संग्रह :: प्रथमं शैलपुत्री

प्रथमं शैलपुत्री

नवग्रह मंत्र

दुर्गा पूजा शक्ति उपासना का पर्व है। नवरात्र में मनाने का कारण यह है कि इस अवधि में ब्रह्मांड के सारे ग्रह एकत्रित होकर सक्रिय हो जाते हैं, जिसका दुष्प्रभाव प्राणियों पर पड़ता है। ग्रहों के इसी दुष्प्रभाव से बचने के लिए नवरात्रि में दुर्गा की पूजा की जाती है।दुर्गा दुखों का नाश करने वाली देवी है। इसलिए नवरात्रि में जब उनकी पूजा आस्था, श्रद्धा से की जाती है तो उनकी नवों शक्तियाँ जागृत होकर नवों ग्रहों को नियंत्रित कर देती हैं। फलस्वरूप प्राणियों का कोई अनिष्ट नहीं हो पाता। दुर्गा की इन नवों शक्तियों को जागृत करने के लिए दुर्गा के 'नवार्ण मंत्र' का जाप किया जाता है। नव का अर्थ नौ तथा अर्ण का अर्थ अक्षर होता है।

प्रथमं शैलपुत्री
अच्छी सेहत और हर प्रकार के भय से मुक्ति दिलाती हैं मां शैलपुत्री। इनकी आराधना से स्थिर आरोग्य और जीवन निडर होता है। व्यक्ति चुनौतियों से घबराता नहीं बल्कि उसका सामना करके जीत हासिल करता है।
मां शैलपुत्री का निर्भय आरोग्य मंत्र
विशोका दुष्टदमनी शमनी दुरितापदाम्।
उमा गौरी सती चण्डी कालिका सा च पार्वती।।
मां शैलपुत्री को दूध का भोग लगायें

मंत्र : शैलपुत्री
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम् ।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम् ॥

शैलपुत्री:- मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप

नवरात्र के प्रथम दिन माता के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाती है | शैलराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है | यह मां दुर्गा का पहला स्वरूप माना गया है | नंदी नामक वृषभ पर सवार शैलपुत्री के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है|

माता शैलपुत्री की पुराणोंनुसार कथा यह आती है कि शैलपुत्री अपने पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी थीं | जिनका नाम सती था | परन्तु राजा दक्ष को महादेव शिव पसंद नहीं होने के कारण, वे इस शिव-सती विवाह से भी नाखुश थे |

इसलिए उन्होंने भगवान शिव को अपमानित करने हेतु एक यज्ञ का आयोजन किया तथा अपने यहां आयोजित यज्ञ में उन्होंने महादेव को आमंत्रित नहीं किया | इस सब घटनाक्रम को अपने पति का अपमान मानकर माता सती अपने पिता से इसकी शिकायत करने गई, लेकिन दक्ष ने माता के सामने भी महादेव का अपमान किया |

तत्पश्चात माता सती पति का अपमान सहन नहीं कर सकीं और यज्ञ की अग्नि में अपने प्राणों कि आहुति दे दी | इस पर महादेव राजा दक्ष पर क्रुद्ध हो गए और उन्होंने वीरभद्र को राजा दक्ष और उसके यज्ञ के विध्वंश हेतु भेजा | तत्पश्चात माता सती का हिमराज के यहाँ पार्वती के रूप पुनर्जन्म हुआ, और भगवान शिव से उनका पुनर्विवाह हुआ | नवरात्रि के प्रथम दिन, माँ शैलपुत्री की पूजा हेतु साधक को मन से “मूलाधार चक्र” में स्थिर होना चाहिए |

स्तुति मंत्र :- या देवी सर्वभू‍तेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता |
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

मूलमंत्र:- माता शैलपुत्री की आराधना हेतु मंत्र इस प्रकार है -
वन्दे वांच्छितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम्‌ | वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्‌ ||

अनमोल विचार