अदभुत धार्मिक स्थल:: आस्था के केंद्र सूर्य मंदिर

आस्था के केंद्र सूर्य मंदिर

औरंगाबाद जिले के देव में स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के बारे में मायन्ताहै कि यहां लाखों श्रद्धालु आते हैं और अपनी मन्नतें पूरी कर लौटते हैं। कार्तिक एवं चैत मास में लगने वाले मेले में श्रद्धालुओं की निरंतर प्रवाह देखते ही बनता है। देवार्कके नाम से विख्यात सूर्य मंदिर की आस्था पूरे देश में फैली है। जिला मुख्यालय से 18किलोमीटर एवं जीटी रोड देव मोड [देव द्वार] से छह किलोमीटर दक्षिण स्थित इस धाम पर देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ से श्रद्धालु पहुंचे हैं।

छठ के मौके पर यहां मेला लगता है। मंदिर में ब्रंा,विष्णु एवं महेश रूपी एकादश सूर्य की प्रतिमा विराजमान है। भगवान की मुखाकृति के अवलोकन के समय यह झलक जाता है कि भगवान उनके प्रति वात्सलयहैं या निर्मिमेष।सूर्य की ऐसी जागृत प्रतिमा शायद अन्यत्र कहीं नहीं है। सूर्य मंदिर उलार सूर्यपुराणमें वर्णित कथा के अनुसार गंगाचार्यऋषि प्रात:काल स्नान करने जा रहे थे। उसी समय श्रीकृष्ण के पुत्र साम्बअपनी पत्‍‌नी के साथ नदी तट पर स्नान कर रहे थे। सुबह की बेला में अर्घनग्नस्त्री पुरुष को साथ स्नान करता देख ऋषि आग बबूलाहो गये। उन्होंने तुरंत श्रीकृष्ण के पुत्र साम्बको श्राप दिया कि तुम्हें कुष्ठ हो जाये। जब कृष्ण को इसकी जानकारी मिली तो वे बडे दुखी हुए। तब नारद जी ने साम्बको श्राप से मुक्ति के लिए बारह विभिन्न स्थानों पर सूर्य मंदिर का निर्माण कराने एवं सूर्य उपासना का उपाय बताया। श्राप मुक्ति का उपाय सुनकर कृष्ण पुत्र साम्बने उलीक,देवीक,पूर्णाक,लोलीक,कोर्णाकसमेत बारह विभिन्न स्थानों पर सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया। तब जाकर उन्हें श्राप से मुक्ति मिली। आगे चलकर उलीकही बोलचाल की भाषा में पटना जिले के दुल्हिनबाजारप्रखंड अंतर्गत उलार नाम से प्रसिद्ध हुआ।

अनमोल विचार