अदभुत धार्मिक स्थल:: श्रीकृष्ण गोशाला

श्रीकृष्ण गोशाला

विभिन्न धर्मग्रंथों में वर्णित है कि गाय में सभी देवी-देवताओं का वास है। हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। यही कारण है कि गायों की सेवा के लिए समय-समय पर देश के विभिन्न भागों में गोशालाओं की स्थापना की जाती है।
हिसार जिले के गांव बुड़ाक में स्थित श्रीकृष्ण प्रणामी गोशाला भी गोसेवा की पर्याय बनी हुई है। इसमें गायों के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है। हरियाणा में 200 से भी अधिक गोशालाएं हैं जो गोभक्तों के सहयोग से सुचारु रूप से चल रही हैं। बुड़ाक में बनी श्रीकृष्ण प्रणामी गोशाला भी सदानंद महाराज व गोभक्तों के सहयोग से दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की पर है। अब इस गोशाला में 300 से भी अधिक गाय हैं। इस गोशाला के प्रांगण की साफ-सफाई देखते ही बनती है। लगभग नौ एकड़ भू-भाग पर बनी इस गोशाला में गायों की सेवा के लिए सभी प्रबंध किए गए हैं। यहां ट्रैक्टर-ट्राली के अलावा पानी का टैंकर, चारा ढोने के लिए बैलगाड़ी, जनरेटर, आटा चक्की मशीन व इन्वर्टर का भी प्रबंध किया गया है। यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले गोभक्तों के रहने के लिए कमरों की व्यवस्था की गई है। गोशाला में उचित व्यवस्था के लिए चार शेड बनाए गए हैं और गायों को गर्मी से बचाने के लिए हर शेड में पंखों की व्यवस्था की गई है। गांव बुड़ाक के निवासी गोशाला में समय-समय पर किए जाने वाले निर्माण कार्यो में बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। गांव बुड़ाक के निवासियों का कहना है कि वे गायों की सेवा को ही परम धर्म मानते हैं।

बुड़ाकवासियों के मन में इस गोशाला के निर्माण का विचार गांव में लावारिस पशुओं की बढ़ती संख्या के कारण आया। ये लावारिस पशु फसलों में काफी नुकसान पहुंचाते थे। खेतों में फसलों की बिजाई के बाद गांव बुड़ाक के निवासियों ने खुली घूमती गायों को एक जगह इकट्ठा किया और उनके चारे का प्रबंध किया। ग्रामीणों ने फसल तैयार होने तक उन गायों को एक जगह रखा और उन्हें चारा व पानी देकर उनकी देखभाल की। इससे ग्रामीणों को फायदा हुआ और खेतों से काफी पैदावार मिली। इस तरह फायदा मिलने पर ग्रामीणों ने एक गोशाला का निर्माण करवाने का विचार किया जिसका प्रतिफल गांव बुड़ाक में स्थित गोशाला वर्तमान में गोसेवा के लिए दूर-दूर तक जानी जाती है।

इस गोशाला के निर्माण में स्वामी सदानंद महाराज का विशिष्ट सहयोग रहा है। ग्रामीण उनसे मिले तो उन्होंने गोशाला खोलने का आश्वासन दिया। उन्होंने पंचायत की जमीन में गोशाला की नींव रखी। गोभक्तों के सहयोग से धीरे-धीरे गोशाला की प्रसिद्धि दूर-दूर तक हुई।
श्रीकृष्ण प्रणामी गोशाला में गायों के लिए काफी सुविधाएं की गई हैं। छोटी तथा बड़ी गायों के लिए अलग-अलग शेड बनवाए गए हैं। दूध देने वाली गायों को अलग शेड में रखा गया है और जो गाय बीमारी के कारण कमजोर हो जाती हैं उनको अलग शेड में रखा जाता है। सभी शेड में पीने के पानी का विशेष प्रबंध किया गया है। समय-समय पर गायों को खेतों में चराने के लिए ले जाया जाता है।

श्रीकृष्ण प्रणामी गोशाला में गोअष्टमी धूमधाम से मनाई जाती है। इस अवसर पर असंख्य गोभक्त यहां आते हैं और गायों के लिए कुछ न कुछ दानस्वरूप अवश्य देकर जाते हैं। यहां साल में दो बार गुरु सदानंद महाराज भी पधारते हैं। इस अवसर पर गोशाला में भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। इस आयोजन में गोभक्तों की भीड़ देखते ही बनती है।

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