विनयपत्रिका :: गोस्वामी तुलसीदास कृत विनयपत्रिका

गोस्वामी तुलसीदास कृत विनयपत्रिका

विनयपत्रिका

श्री तुलसीदास जी काशी जी में असी घाट पर रहने लगे थे । रात में कलियुग मूर्तरूपधारण करउनके पास आया और उन्हे त्रास देने लगा। गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमान जी का ध्यान किया। हनुमान जी ने उन्हे विनय पद रचने को कहा। इस पर गोस्वामी तुलसीदास जी ने विनय पत्रिका लिखी और भगवान के चरणों में उसे समर्पित कर दी। श्रीराम ने उस विनय पत्रिका पर अपने हस्ताक्षर कर दिए। तुलसीदास जी असी घाट पर प्रतिदिन राम कथा कहते थे। सवंत् 1680 श्रावण कृष्ण तृतीया शनिवार को असी घाट पर गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम-राम कहते हुए अपने शरीर का त्याग किया। गोस्वामी तुलसीदास श्रीराम धाम में चले गए। संसार को श्री रामचरितमानस ग्रंथ की रचना कर भवसागर से पार जाने का रास्ता बता गए। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामायण जी को माहात्म्य का वर्ण करते हुए गुरु जी विष्णु जी, शिव जी, गणेश जी, सरस्वती जी तथा वाल्मीकि जी का स्मरण करते हुए कहा कि रामायण कल्पवृक्ष की छाया है, जो इसके पास आता है, उसके सब पाप नष्ट हो जाते हैं।

’विनय-पत्रिका’ गोस्वामी तुलसीदास की एक अपूर्व कारयित्री प्रतिभा का उच्छलन है । इस कृति में ’रसः शान्तस्तथा परम’ का कलकल प्रवाह है । रचना-प्रणाली, शब्द-विन्यास-पटुता, शैली-भाषा, भाव-गाम्भीर्य, शब्द-चयन-चातुर्य तथा विषय-प्रतिपादन-सौष्ठव के कारण विनय-पत्रिका एक विरल प्रभविष्णु कृति हो गयी है ।

अनमोल विचार
तुलसीदास विनयपत्रिका

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