व्रत कथा संग्रह :: बुधवार व्रत कथा

बुधवार व्रत कथा

व्रत कथा

विधि:

यह उपवास सप्ताह के प्रथम दिवस इतवार व्रत कथा को रखा जाता है। रविवार सूर्य देवता की पूजा का वार है। जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है। रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। मान-सम्मान, धन-यश तथा उत्तम स्वास्थ्य मिलता है। कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
सुबह स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें, शान्त मन से व्रत का संकल्प लें| सत्य बोले व ईमानदारी का व्यव्हार करें और परोपकारी का काम अवश्य करें | व्रत के दिन एक ही समय भोजन करें | भोजन तथा फलाहार सूर्यास्त से पहले ही कर लें | यदि सूर्य छिप जाए तो दूसरे दिन सूर्य भगवान को जल देकर ही अन्न ग्रहण करें | व्रत की समाप्ति के पूर्व रविवार की कथा अवश्य सुनें या पढ़ें| व्रत के दिन नमकीन या तेलयुक्त भूलकर भी न खाएं| इस व्रत के करने से नेत्र रोग को छोड़कर सभी रोग दूर होते हैं | राज सभा में सम्मान बढ़ता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है|

बुधवार व्रत की विधि
- इस व्रत के दिने केवल एक ही बार भोजन करना होता है |
- इसमें हरी वस्तुओं का भी प्रयोग होना चाहिए|
- यह व्रत शंकर भगवान का है| शंकर की पूजा धूप, तेल प्रत्रादि से की जाती है| व्रत की समाप्ति से पहले बुद्धदेव की कथा अवश्य सुन्नी चाहिए|
- यह व्रत सभी प्रकार के सुखों को देने वाला और पति पत्नी के मध्य शांति व प्रेम बनाये रखने वाला होता है|

|| बुधवार व्रत कथा ||
एक समय एक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा करवाने के लिये अपनी ससुराल गया । वहाँ पर कुछ दिन रहने के पश्चात् सास-ससुर से विदा करने के लिये कहा । किन्तु सबने कहा कि आज बुधवार का दिन है आज के दिन गमन नहीं करते है । वह व्यक्ति किसी प्रकार न माना और हठधर्मी करके बुधवार के दिन ही पत्नी को विदा कराकर अपने नगर को चल पड़ा । राह में उसकी पत्नी को प्यास लगी तो उसने अपने पति से कहा कि मुझे बहुत जोर से प्यास लगी है । तब वह व्यक्ति लोटा लेकर रथ से उतरकर जल लेने चला गया । जैसे ही वह व्यक्ति पानी लेकर अपनी पत्नी के निकट आया तो वह यह देखकर आश्चर्य से चकित रह गया कि ठीक अपनी ही जैसी सूरत तथा वैसी ही वेश-भूषा में वह व्यक्ति उसकी पत्नी के साथ रथ में बैठा हुआ है ।

उसने क्रोध से कहा कि तू कौन है जो मेरी पत्नी के निकट बैठा हुआ है । दूसरा व्यक्ति बोला कि यह मेरी पत्नी है । मैं अभी-अभी ससुराल से विदा कराकर ला रहा हूँ । वे दोनों व्यक्ति परस्पर झगड़ने लगे । तभी राज्य के सिपाही आकर लोटे वाले व्यक्ति को पकड़ने लगे । स्त्री से पूछा, तुम्हारा असली पति कौन सा है । तब पत्नी शांत ही रही क्योंकि दोनों एक जैसे थे ।

वह किसे अपना असली पति कहे । वह व्यक्ति ईश्वर से प्रार्थना करता हुआ बोले – हे परमेश्वर यह क्या लीला है कि सच्चा झूठा बन रहा है । तभी आकाशवाणी हुई कि मूर्ख आज बुधवार के दिन तुझे गमन नहीं करना था । तूने किसी की बात नहीं मानी । यह सब लीला बुधदेव भगवान की है । उस व्यक्ति ने तब बुधदेवी जी से प्रार्थना की और अपनी गलती के लिये क्षमा माँगी । तब बुधदेव जी अन्तर्ध्यान हो गए । वह अपनी स्त्री को लेकर घर आया तथा बुधवार का व्रत वे दोनों पति-पत्नी नियमपूर्वक करने लगे । जो व्यक्ति इस कथा को श्रवण करता तथा सुनाता है उसको बुधवार के दिन यात्रा करने का कोई दोष नहीं लगता है, उसको सर्व प्रकार से सुखों की प्राप्ति होती है ।

|| अथ बुधवार की आरती ||
आरती युगलकिशोर की कीजै । तन मन धन न्यौछावर कीजै ।।
गौरश्याम मुख निरखत रीजै । हरि का स्वरुप नयन भरि पीजै ।।
रवि शशि कोट बदन की शोभा । ताहि निरखि मेरो मन लोभा ।।
ओढ़े नील पीत पट सारी । कुंजबिहारी गिरवरधारी ।।
फूलन की सेज फूलन की माला । रत्न सिंहासन बैठे नन्दलाला ।।
कंचनथार कपूर की बाती । हरि आए निर्मल भई छाती ।।
श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी । आरती करें सकल ब्रज नारी ।।
नन्दनन्दन बृजभान, किशोरी । परमानन्द स्वामी अविचल जोरी ।।

अनमोल विचार